इश्क़ हल्ले-सुआलीस्त
पादशह को गदा करे,
ख़ामशी से सदा करे।
अलग़यासो-हू हू करे,
मुब्तिला जो हुआ करे।
जिससे कुम्री कू कू करे,
बूफ़ दश्त में रहा करे।
चश्मे-नर्गिस निगह करे,
कौन दीगर शिफ़ा करे?
फ़िर न हो बेख़बर ख़बर,
जिसपे गर वो जफ़ा करे।
ज़ुल्फ़ का हो असीर जो,
है! उसे जो रिहा करे?
इश्क़ हल उस सवाल का
बंदे से जो ख़ुदा करे।
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