Wednesday, 29 December 2021

इश्क़ हल्ले-सुआलीस्त

 पादशह को गदा करे,
 ख़ामशी से सदा करे। 
 अलग़यासो-हू हू करे, 
मुब्तिला जो हुआ करे।
 जिससे कुम्री कू कू करे, 
बूफ़ दश्त में रहा करे। 
 चश्मे-नर्गिस निगह करे, 
कौन दीगर शिफ़ा करे?
 फ़िर न हो बेख़बर ख़बर,
 जिसपे गर वो जफ़ा करे।
 ज़ुल्फ़ का हो असीर जो,
 है! उसे जो रिहा करे? 
इश्क़ हल उस सवाल का 
बंदे से जो ख़ुदा करे। 

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