Saturday, 14 October 2023

On Zindeginama of Bhai Nandlal Sahib

 ज़िन्दगीनामा: भाई नंदलाल सिंह 'गोया'(1633-1713)

             'ज़िन्दगी के प्याले में बंदगी का अमृत'

       जहाँ फ़ारसी काव्य परम्परा में दक़ीक़ी और रूदकी को पहले कवि और बाबा-ए-फ़ारसी के नाम से जाना जाता है, फ़िरदौसी को दोबारा भाषा को ज़िंदा करने का श्रेय दिया जाता है, ख़य्याम की रूबाईयों में जीवन के हर एक क्षण को जीने की हिदायत है,रूमी इश्क़-ओ-वहदत की तार छेड़ते हैं,सा,दी ने शाइरी में ग़ज़ल की विधा में अपरिहार्य योगदान दिया है और बड़े बुज़ुर्ग की तरह जीवन के हर पक्ष में हिदायतें दी हैं, ख़्वाजा-ए-शीराज़ को 'लिसानुल-ग़ैब' का सम्मान प्राप्त है और उनके दीवान से फ़ाल निकाले जाते हैं और हुक्मनामे लिए जाते हैं, और सबक़-ए-हिंदी में बेदिल दिहलवी को उनकी शायरी में अनोखेपन और उनकी दूर-दराज़ से लेकर बिम्बों को शाईरी में आत्मसात कर लेने की कला के कारण जाना जाता है और खुसरौ व बू अली क़लन्दर अपना अलग मुक़ाम रखते हैं। वहीं भाई नंदलाल 'गोया' की तरफ़ कम ही नज़र पड़ी है।

        भाई नंदलाल सिंह 'गोया' गुरू गोबिंद सिंह के प्रिय सिख थे। भाई नन्दलाल फ़ारसी ही नहीं अरबी के भी विद्वान थे और वे शहज़ादे मुअज़्ज़म के उस्ताद थे। 

  उनकी शायरी का मुख्य तत्व या कहें कि आधार 'बंदगी' ही है। और उनकी एक किताब का नाम 'बंदगीनामा' भी है, जो फ़ारसी की मस्नवी शैली में लिखी गई है। बंदगीनामा को पढ़ने के बाद गुरू गोबिंद सिंह जी ने इसका नाम 'ज़िंदगीनामा' रख दिया और इसी की बह्र में एक शे,र कहा:

 زآب حیوان پر شده چو جام او

زندگینامه شده زآن نام او

     ज़ाबे-हैवान् पुर शुदे चू जाम-ए-ऊ

         ज़िन्दगीनामे शुदे ज़ान् नाम-ए-ऊ

(अर्थात यह(ग्रंथ) अमृत से भरा हुआ है, इसलिए इसका नाम 'ज़िन्दगीनामा' होता है।)


(गुरू साहिब ख़ुद एक योद्धा होने के साथ-साथ फ़ारसी के कवि भी थे। उन्होंने ख़ुद फ़ारसी की मस्नवी शैली में तत्कालीन बादशाह औरंगज़ेब को दो पत्र 'ज़फ़रनामा' और 'फ़तहनामा' लिखे, जिससे उनकी काव्य कला और शिल्प पर प्रकाश पड़ता है और उनकी अन्य रचना 'जापु साहिब' के मधुबार छन्द में 'ज़फ़रनामा' के शे'रों को बड़ी ही शिल्पता से प्रयोग किया गया है। तो इसमें कोई दोराय नहीं की 'बंदगीनामा' एक सटीक नाम से इतर दूसरा नाम 'ज़िन्दगीनामा' अध्ययन पश्चात् ही दिया गया है।)

       फ़ारसी काव्य परम्परा में बंदगी पर इतने अश्आर और किसी शाइर ने नहीं कहे होंगे जितने कि 'गोया' ने कहे हैं, मौलाना की मस्नवी को छोड़कर, जिसके बारे में कहा गया है:مثنوی معنوی مولوی/هست قرآن در زبان پهلوی "मस्नवीये-मा'नवीये-मौलवी/ हस्त क़ुरआन् दर ज़बाने-पहलवी"(मौलाना रूमी कृत अर्थपूर्ण(ईश्वरीय भेदों) का काव्यग्रंथ पहलवी (मध्य फ़ारसी) भाषा की क़ुरान है)। गोया पर हाफ़िज़ के साथ-साथ मौलाना का भी प्रभाव है। मौलाना का एक शे'र देखें:

زندگی آمد برای بندگی

زندگی بی بندگی شرمندگی

            "ज़िन्दगी आमद बराये-बन्दगी

              ज़िन्दगी बी बन्दगी, शर्मिन्दगी"

(ज़िन्दगी बंदगी के लिए मिली है, बिना बन्दगी केवल शर्मिंदगी है।)

और अब गोया के द्वारा कुछ अश्आर देखें:

بنده تا باشد برای بندگی

غیر حرف حق همه شرمندگی

             "बन्द: ता बाशद बराये-बंदगी

              ग़ैरे-हर्फ़े-हक़ हमे शर्मिन्दगी"

(बंदे का तो काम ही बन्दगी है, बिना 'ज़िक्र' जीवन शर्मिंदगी है, व्यर्थ है।)

این وجود خاک پاک از بندگیست

گفتگو های دگر شرمندگیست

           "ईन् वजूदे-ख़ाक पाक'ज़ बन्दगी-स्त

            गुफ़्तगू-हाये-दिगर शर्मिन्दगी-स्त"

این همه از دولت این بندگیست

زندگی بی بندگی شرمندگیست

           "ईन् हमे अज़ दौलते-ईन् बन्दगी-स्त

            ज़िन्दगी बी बन्दगी शर्मिन्दगी-स्त"

       ज़िन्दगी के हर शे,र में बन्दगी का फ़लसफ़ा प्रकट होता है। यह उनकी काव्य कला की ख़ूबसूरती ही कही जा सकती है कि उन्होंने अलग-अलग अश्आर में अलग-अलग बिम्बों के द्वारा बन्दगी ही के फ़लसफ़े को दोहराया है।यहाँ तक की उनकी सभी रचनाओं में बंदगी का ही फ़लसफ़ा/ बन्दगी ही मुख्य मौज़ू है। चाहे उनकी ग़ज़लियात हों या 'गंजनामा', सभी में बंदगी का रसास्वादन किया जा सकता है। प्रेम और बन्दगी ही उनकी शाइरी के मुख्य मौज़ू हैं। बेदिल और ख़ुसरौ के बाद अगर किसी क्लासिक शाइर का नाम आता है तो वे 'गोया' हैं। अगर हम उनकी किताब को कहीं से भी खोलें तो जिस भी शे'र पर निगाह पड़ेगी, उसमें से बन्दगी ही झलकेगी। 

  बंदगीनामा से उनके कुछ रेंडम अश्आर देखें:

گر تو خوانی نسخه ای از شان عشق

می شوی سر دفتر دیوان عشق

       ० गर तु ख़ानी नुस्ख़:ई अज़ शाने-इश्क़

          मी-शवी सर दफ़्तरे-दीवाने-इश्क़

(अगर प्रेम की शान वाली पुस्तक से एक नुस्ख़ा(पाठ) पढ़लोगे, तो तुम्हारा नाम भी इश्क़ की शाइरी के दफ़्तर के ऊपर-ऊपर होगा।)

یا الهی این دلم را شوق ده

لذتی از شوق خاص و ذوق ده

       ० या इलाही ईन् दिलम् रा शौक़ दह्

          लज़्ज़ती अज़ शौक़े-ख़ासो-ज़ौक़ दह्

(हे ईश्वर! मेरे ह्रदय,मेरे दिल को शौक़ दो ताकि मैं तेरी बन्दगी में लुत्फ़ो-लज़्ज़त हासिल कर सकूँ।)

معنی این کو به کو دانی که چیست

حمد گو دیگر مگو اینست زیست

      ० मा'नी-ये-ईन् कू-ब-कू दानी कि: चीस्त्

         हम्द गू दीगर मगू ईनस्त जीस्त्

(जानते हो इस गली से उस गली में भटकने का क्या मतलब है? उसकी सिफ़्त-ओ-सलाह करो, और कुछ न कहो, यही ज़िन्दगी है।)

حرف دیگر نیست غیر از یاد حق

یاد حق هان یاد حق هان یاد حق

       ० हर्फ़े-दीगर नीस्त ग़ैर अज़ यादे-हक़

         यादे-हक़ हान् यादे-हक़ हान् यादे-हक़ 

(रब की याद के बिना कोई दूसरा शब्द न पढ़, रब की याद हाँ, रब की याद हाँ, रब की याद।)

در دل گویا هوای شوق بخش

بر زبانش ذره ای از ذوق بخش

      ० दर दिले-गोया हवाये-शौक़ बख़्श

         बर ज़ुबान'श ज़र्रेई अज़ ज़ौक़ बख़्श

(हे प्रभू! अकाल पुरख! गोया के दिल में प्रेम की तीव्र इच्छा बख़्श, गोया की जीभ पर अपने ज़ौक़(परमानन्द) का किनका बख़्श।)

صاحبانرا بنده بسیار آمده

بنده را با بندگی کار آمده

      ० साहिबान् रा बन्द: बिस्यार् आमदे

         बन्द: रा बा बन्दगी कार् आमदे

(साहिबों/ बादशाहों के हज़ारों सेवक/बंदे होते हैं, बन्दे का काम तो उनकी बन्दगी करना है।)

    इसी तरह ज़िंदगीनामा के हर एक शे,र में बंदगी ही झलकती है। उनकी रचना में ख़्याल की बारम्बारता उनके काव्य में बन्दगी के रसास्वादन को जगाए रखती है और प्रेम और बंदगी की चाश्नी में पूरा मज़ा, लज़्ज़त देती है।

तो ज़िन्दगीनामा को 'ज़िन्दगी के प्याले में बन्दगी रूपी अमृत' कहना कोई अतिश्योक्ति नही होगी।

#bikhabar_khoshdel (June, 2021:Sriganganagar)

A Verse

 I tread the roads untravelled as do owls

Adore solitary winds on the barren trees.

Waheguru

 A comment on a post related to the etymology of #waheguru

ਉਤਲਾ ਸਹੀ ਹੈ। 'ਵਾਹ' ਫ਼ਾਰਸੀ ਸ਼ਬਦ ਹੈ ਜਿਹੜਾ ਮੱਧਕਾਲੀ ਫ਼ਾਰਸੀ(ਪਹਿਲਵੀ)ਦੀਆਂ ਲਿਖਤਾਂ ਵਿੱਚ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ। ਸਅਦੀ(ਸਾ'ਦੀ) ਸ਼ੀਰਾਜ਼ੀ ਦੀਆਂ ਗ਼ਜ਼ਲਾਂ 'ਚ ਵੀ 'ਵਹ' ਦੇ ਰੂਪ 'ਚ ਆਉਂਦਾ ਹੈ:"ਵਹ ਕਿਹ੍ ਗਰ ਮਨ ਬਾਜ਼ ਬੀਨਮ ਰੂਯਿ-ਯਾਰੇ-ਖ਼ੀਸ਼ ਰਾ"। ਸਮਕਾਲੀ ਫ਼ਾਰਸੀ 'ਚ 'ਬਹ ਬਹ' ਰੂਪ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲ਼ਦਾ ਹੈ। ਇਹਦਾ ਸ਼ਾਬਦਿਕ ਅਰਥ ਵਾਹਿਦ ਮੰਨਣਾ ਸਹੀ ਨਹੀਂ ਜਾਪਦਾ।

ਇਹਦੇ ਨਾਲ਼ ਰਲ਼ਦੇ ਕੁਝ ਹੋਰ ਸ਼ਬਦ: ਜ਼ਹਾਜ਼ਿਹ;ਜ਼ਹੀ;ਖ਼ੁਸ਼ਾ ਆਦਿ।

'ਜਾਦੇ ਜਾਨਕਾਰੀ ਵਸਤੇ ਜਸਵੀਰ ਸਿੰਘ ਪਾਬਲਾ ਜੀ ਦਾ ਇਹ ਲੇਖ ਪੜ੍ਹਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ:

If I can stop one heart from breaking by Emily Dickinson

 A_poem_by_Emily_Dickinson(1830-1886) 

ਜੇ ਕਿਸੇ ਦਿਲ ਨੂੰ ਟੁੱਟਣ ਤੁੰ ਬਚਾ ਸਕਾਂ, 

ਫਿਰ ਇਹ ਜਿੰਦ ਬਿਰਥੀ ਨਾ ਜਾਸੇ। 

ਜੇ ਕਿਸੇ ਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਰੰਜ ਦੂਰ ਕਰਾਂ, 

ਜਾਂ ਫਿਰ ਜ਼ਖ਼ਮੀਂ ਮਲ੍ਹਮਾਂ ਲਾਵਾਂ,

ਜਾਂ ਗ਼ਸ਼ ਖਾਦ੍ਹੀ ਕਿਸੇ ਚਿੜੀ ਨੂੰ, 

ਮੁੜ ਚੁੱਕ ਆੱਲ੍ਹਣੇ ਧਰ ਆਸਾਂ, 

ਫਿਰ ਇਹ ਜਿੰਦ ਬਿਰਥੀ ਨਾ ਜਾਸੇ।


Original text of the poem:

If I can stop one Heart from breaking (919) by Emily Dickinson

If I can stop one Heart from breaking_

 I shall not live in vain;

If I can ease one Life the Aching

 Or cool one Pain

 Or help one fainting Robin

 Unto his Nest again

 I shall not live in Vain.

Hafez Shirazi-1

 نامه‌ای از من اگر سویت نمی اید نرنج

هر چه را مینویسم اشک پاکش میکند

Nameh-ī az man agar suyat nemi āyad naranj

Harcheh rā minavīsam ashak pākesh mi-konad

If thou dost not find any letter from me, don't be hurt, 

For everything I write, my tears wash it away. 


An excerpt from Edmund Spenser:

One day I wrote her name upon the strand,

But came the waves and washéd it away. 

Again I wrote it with a second hand,

But came the tide, and made my pains his prey.

Hafez Shirazi

 گناه اگر چه نبود اختیارِ ما حافظ


تو در طریقِ ادب باش، گو گناهِ من است


ਗੁਨਾਹ ਗਰਚਿਹ੍ ਨਬੂਦ੍ ਇਖ਼ਤਿਆਰਿ-ਮਾ ਹਾਫ਼ਿਜ਼। 

ਤੁ ਦਰ ਤਰੀਕ਼ਿ-ਅਦਬ ਬਾਸ਼ ਗੂ ਗੁਨਾਹਿ-ਮਨਸ੍ਤ।। 

 ਅਗਰਚੇ ਗੁਨਾਹ ਕਰਨਾ ਸਾਡੇ ਹੱਥ 'ਚ ਨ੍ਹਈਂ ਹੈਗਾ,#ਹਾਫ਼ਿਜ਼

ਪਰ ਤੂੰ ਅਦਬ ਨਾਲ ਆਖ 'ਸਭ ਗੁਨਾਹ ਮੇਰਾ ਈ ਐ'।

Ghazalgard

 #Ghazalgardi #Ghazalgard would literally translate as 'visit of ghazal'. Gard is the present stem of gardidan- to set out for; to visit...(or to find structural beauty and ecstasy in ghazal) 

But acc. to the traditional panjabi sense, it looks interesting word for the 'poets devoid of poetic sense or bad Meterists'.

The world of words is amazing and progressive. The words travel the miles as wind does.When the wind passes through reeds, its sound is different as comparing to it passes through other objects; there is some difference in its sound when the reed is structurally bored into it turns into a flute and symphonies come out.But the difference is not fundamental: words retain their actual meaning too.The words besides their literal meaning find a change in meaning according to some specific cultures and linguistic, socio-political and historical traditions. The Persian words 'ghareeb' meaning 'alien or outsider' changes into ' the poor'(urdu) ; 'khamush/khamosh' (to shut something off: cheraghi ru khamush kon-shut the light off) into 'to be quiet'(urdu); khaab(sleep) turns into 'dream'.

Doctor Mangat Bhardwaj writes that a Ghazalgard is the one that plunders into the land of ghazal just like an invader does. So here the meaning is negative.

Bikhabar Khoshdel

 ਕਾਸ਼ ਬਾ ਯਕ ਜ਼ਰਬਿਹ ਮੀਕਰਦੀ ਸਰ—ਮ ਅਜ਼ ਤਨ ਜੁਦਾ। 

ਜ਼ਿਬ੍ਹਿ-ਆਸ਼ਿਕ਼ ਦਰ ਮਰਾਮੇ-ਮਾ ਹਲਾਲਸ੍ਤੋ-ਹਲਾਲ।। 


ਰਫ਼ਤੀ ਓ ਅਇ ਆਨ੍ ਨਿਗਾਹੇ-ਤੂ ਦਲੀਲੇ-ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਸ੍ਤ। 

ਵਰਨਿਹ ਦਰ ਈਨ੍ ਖ਼ਾਰੋ-ਖ਼ਸ ਜਾਨਮ ਮੁਹਾਲਸ੍ਤੋ ਮੁਹਾਲ।। 


*—ਜੇ ਹਿੱਕੋ ਝਟਕੇ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸੱਟਦਾ ਮਸਲੇ ਹੱਲ! ਕੀ ਜਾਂਦਾ? 

ਉਹਨੇ ਆਖਿਆ 'ਰੰਦਾ ਫੇਰਨਾ ਈਂ ਤਾਂ ਸਾਡਾ ਕਿੱਤਾ ਐ।' 

ਭਾਵ: 

—ਕਾਸ਼ ਤੂੰ ਇੱਕ ਵਾਰੀ 'ਚੀ ਝੱਟਕਾ ਦਿੰਦਾ! 

— ਕੋਈ ਗੱਲ ਨੀਂ! ਸਾਡੇ ਆਸ਼ਿਕ਼ ਨੂੰ ਜ਼ਿਬਾਹ੍ ਕਰਨਾ ਹਲਾਲ ਮੰਨਿਆਂ ਜਾਂਦਾ। 

ਤੂੰ ਲੰਘ ਗਿਐਂ 'ਤੇ ਤੇਰੀ ਉਹ ਨਿਗਾਹ ਈ ਐ ਦਲੀਲ ਜੀਵਣ ਦੀ, 

ਨ੍ਹਈਂ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਭੱਖੜਿਆਂ 'ਚ ਜਾਨ ਔਖੀਓ ਈ ਸੀ! 

کاش با یک ضربه میکردی سرم از تن جدا

ذبح عاشق در مرام ما حلال است و حلال


رفتی و ای آن نگاه تو دلیل زندگی است

ورنه در این خار و خس جانم محال است و محال

#Bikhabar_Khoshdel

ਪਤੰਦਰ

 Editing... #ਪਤੰਦਰ ਸ਼ਬਦ ਫਾਰਸੀ ਮੂਲ ਦੇ 'ਪਿਦਰ-ਅੰਦਰ;ਪਦੰਦਰ' ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਵਿਗੜਿਆ ਰੂਪ ਕਿਹਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਐ। 

ਲੁਗ਼ਤਨਾਮਿਹ-ਯ-ਦਹਿਖ਼ੁਦਾ;لغت‌نامه دهخد(one of the greatest compiled dictionaries in the world having 200+ volumes compiled by Ali Akbar Dehkhoda) 'ਚ ਇਹਦਾ ਇੰਦਰਾਜ ਇਉਂ ਐ:

1) پدراندر:literally; Step-fatherਪਿਦਰੰਦਰ 

2) بدندر:ਪਿਦੰਦਰ:

3) مادندر:stepmother

All the three have Pahlavi roots. ਪੰਜਾਬੀ 'ਚ ਇਹਦਾ ਸ਼ਾਬਦਿਕ ਅਰਥ ਘੱਟ ਈ ਇਸਤੇਮਾਲ ਹੁੰਦਾ ਐ ਤੇ ਆਮਤੌਰ ਤੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਇਹਦੇ ਬਾਰੇ 'ਜਾਦੇ ਪਤਾ ਵੀ ਨ੍ਹਈਂ। ਇਹ ਸ਼ਬਦ ਪੁਰਾਣੀ ਫ਼ਾਰਸੀ 'ਤੇ ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਅਵੇਸਤਾ ਨਾਲ ਮੇਲ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤ ਨਾਲ਼ ਵੀ ਮੇਲ ਖਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਤਰਜਮਾ ਇਉਂ ਹੋਉਗਾ: ਪਿਤ੍ਰ ਅੰਤਰ ਆਦਿਕ। *ਪੰਜਾਬੀ ਅਰਥ ਥੱਲੇ ਦੇਖੋ:


پدراندر. [پ ِ دَ اَ دَ ] (اِ مرکب ) پدندر. شوهرمادر. ناپدری . شوی مادر. (فرهنگ اسدی نسخه ٔ آقای نخجوانی ). راب ّ.


از پدر چون از پدندر دشمنی بیند ھمی

مادر از کینه بر او مانند مادندر شود

 لبیبی(از صحاح الفرس)

ਅਜ਼ ਪਿਦਰ ਚੁਨ੍ ਅਜ਼ ਪਦੰਦਰ ਦੁਸ਼ਮਨੀ ਬੀਨਦ ਹਮੀ। 

ਮਾਦਰ–ਜ਼ ਕੀਨੇ ਬਰੂ ਮਾਨੰਦੇ-ਮਾਦੰਦਰ ਸ਼ਵਦ।। 

#ਲਬੀਬੀ

ਭਾਵ: ਪਿਓ ਤੋਂ ਉਹਨੂੰ ਸੌਤੇਲੇ ਪਿਉ ਵੰਗੂੰ ਵਿਹਾਰ ਮਿਲ਼ਿਆ 'ਤੇ ਮਾਂ ਵੀ ਇਰਖਾ-ਗੁੱਸੇ 'ਚ ਸੌਤੇਲੀ/ਮਤਰੇਈ ਮਾਂ ਹੋਈ।


Jasvir Singh Pabla ਜੀ ਦਾ ਸਟੀਕ/ਕਮਿੰਟ:

--- ਭਾਰਤੀ ਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ਦਾ ਤਾਂ ਇਹ ਸ਼ਬਦ ਹੀ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਇਹ ਫ਼ਾਰਸੀ ਭਾਸ਼ਾ ਦਾ ਸ਼ਬਦ ਹੈ। ਮੂਲ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਇਹ ਸ਼ਬਦ 'ਪਿਦਰਅੰਦਰ' ਹੈ ਜਿਸ ਦੇ ਅਰਥ ਹਨ- ਸੁਤੇਲਾ ਬਾਪ, ਮੱਲੋ-ਮੱਲੀ ਬਣਿਆ ਖ਼ਸਮ, ਧਗੜਾ; 

ਵਿਭਚਾਰੀ; 

ਵੱਡਾ, ਬਜ਼ੁਰਗ, ਬਾਬਾ (ਨਿੰਦਿਆਵਾਚਕ ਸ਼ਬਦ);

ਗੁਰੂ-ਘੰਟਾਲ, ਉਸਤਾਦ।

---ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਇਹ ਪਿਦਰਅੰਦਰ ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਸੰਖੇਪ ਅਤੇ ਫ਼ਾਰਸੀ ਤੋਂ ਆਇਆ ਇੱਕ ਤਦਭਵ ਸ਼ਬਦ ਹੈ।

---ਇਸ ਵਿੱਚ ਪਿਦਰ ਦਾ ਭਾਵ ਹੈ- ਪਿਤਾ ਅਤੇ 

ਅੰਦਰ ਦਾ ਭਾਵ ਹੈ- ਅੰਦਰ ਖਾਤੇ/ ਅੰਦਰ ਖ਼ਾਨੇ

    ਭਾਵ ਜੋ ਅੰਦਰਖਾਤੇ ਅਰਥਾਤ ਵਲ਼-ਛਲ਼/ਧੋਖੇ/ਧੱਕੇ ਨਾਲ਼ ਕਿਸੇ ਔਰਤ ਦਾ ਪਤੀ/ਉਸ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦਾ ਸੁਤੇਲਾ ਬਾਪ ਬਣਿਆ ਹੋਵੇ। 

---ਅਸਲ ਗੱਲ ਤੱਕ ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਪਹੁੰਚੇ ਹੀ ਨਹੀਂ। ਇਹ ਲੋਕਾਂ/ਸ੍ਰੋਤਿਆਂ/ਦਰਸ਼ਕਾਂ ਦੀਆਂ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਨਾਲ਼ ਖਿਲਵਾੜ ਹੈ।

---ਇਹ ਧਾਤੂ ਜਾਂ ਮੂਲ ਸ਼ਬਦ ਕਿਵੇਂ ਹੋਇਆ ? ਇਹ ਤਾਂ ਦੋ ਸ਼ਬਦਾਂ: ਪਿਦਰ ਅਤੇ ਅੰਦਰ ਦੇ ਮੇਲ਼ ਨਾਲ਼ ਬਣਿਆ ਇੱਕ ਸਮਾਸੀ ਸ਼ਬਦ ਹੈ। ਅੰਦਰ ਵੀ ਫ਼ਾਰਸੀ ਦੇ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਸ਼ਬਦ ਦਾ ਸੰਖੇਪ ਜਾਂ ਵਿਗੜਿਆ ਹੋਇਆ ਰੂਪ ਹੈ।

--ਬਹੁਤ ਹੀ ਗ਼ਲਤ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸ ਤੋਂ ਗੁਰੇਜ਼ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਸੰਬੰਧਿਤ ਵਿਸ਼ੇ ਦੁਆਲ਼ੇ ਹੀ ਰਿਹਾ ਜਾਵੇ।

-- ਬੜੇ ਅਫ਼ਸੋਸ ਨਾਲ਼ ਲਿਖਣਾ ਪੈ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ 'ਪਤੰਦਰ' ਸ਼ਬਦ ਬਾਰੇ ਤੁਸੀਂ ਇੱਕ ਪ੍ਰਤਿਸ਼ਤ ਵੀ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਨਹੀਂ ਦੇ ਸਕੇ।

--ਕੀ ਇਹ ਚੈਨਲ ਕੇਵਲ ਹਾਸੇ-ਠੱਠੇ ਲਈ ਹੀ ਹੈ?

---ਪਤੰਦਰ ਸ਼ਬਦ ਫ਼ਾਰਸੀ ਭਾਸ਼ਾ ਦੇ ਪਿਦਰੰਦਰ (ਪਿਦਰ+ਅੰਦਰ) ਦਾ ਤਦਭਵ ਅਤੇ ਸੰਖੇਪ ਰੂਪ ਹੈ।"

Sa'di Shirazi

 ਹਮੇ ਕ਼ਬੀਲਿਹ-ਯੇ ਮਨ ਆ਼ਲਿਮਾਨਿ-ਦੀਨ ਬੂਦੰਦ।

ਮਰਾ ਮੁਅ਼ਲਿੱਮਿ-ਇ਼ਸ਼ਕ਼ੇ-ਤੁ ਸ਼ਾਇ਼ਰੀ ਆਮੂਖ਼੍ਤ।। 

#ਸਾਦੀ_ਸ਼ੀਰਾਜ਼ੀ

 All of my forefathers were merely kind of Puritans, 

But thy Agápe/amorousness has taught me to consecrate a lay.

Qasim Kalwana

 ਯਾਦਾਂ ਦੇ ਸੱਥਰ 'ਤੇ ਅੱਖੀਆਂ ਦੇ ਰੱਲੇ, 

ਮੇਰਾ ਦਿਲ ਪਿਟੇੰਦੈ ਨਿਮਾਸ਼ਾਂ ਤੂੰ ਪਿੱਛੇ।


#ਕਾਸਿਮ ਕਲਵਾਨਾ(ਸਰਾਇਕੀ ਸ਼ਾਇਰ) 

 *ਰੱਲੇ-ਰੇਲੇ;ਹੜ੍ਹ
*ਨਿਮਾਸ਼ਾਂ-ਨਮਾਜ਼ਿ-ਸ਼ਾਮ ਦਾ ਵਿਗੜਿਆ ਰੂਪ;ਆੱਥਣ

#Qasimkalwana

Maulana Rumi

 Дило низди касй биншйн ки о аз дил хабар дорад. 

Маулоно Румй


Delā nizdi-kâsī binshīn kih ō az dil khâbár dorád


O Heart, Sit beside the One who has empathy for you. (Rumi)

Maulana Rumi

 ਦਰੀਨ੍ ਖ਼ਾਕ ਦਰੀਨ੍ ਮੁਜ਼ਰਅ਼ਿ-ਪਾਕ

ਬਜੁਜ਼ ਮਿਹਰ ਬਜੁਜ਼ ਇ਼ਸ਼ਕ਼ ਦਿਗਰ ਬਜ਼੍ਰ ਨਕਾਰੀਮ।

#ਮੌਲਾਨਾ_ਰੂਮੀ

ਇਸ ਮਿੱਟੀ 'ਚ ਇਸ ਖੇਤ 'ਚ ਅਸੀਂ ਮਿਹਰ 'ਤੇ ਪ੍ਰੇਮ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਕੋਈ ਬੀਅ ਨ੍ਹਈਂ ਗੁਡਦੇ।

A Verse by Bikhabar Khoshdel

 ਮੈਂਨੂੰ ਪਤਾ ਐ ਸਾਹ, ਪਾਣੀ 'ਤੇ ਲਹੂ ਰਵੇ ਹਨ,(ਜੇ ਰੁਕਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਰੁਕ ਈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ) 

ਤੂੰ ਸੋਚ ਲੈ ਆਖ਼ਰ ਨ੍ਹਈਂ ਰਹਿਣਾ ਜਿਹੜਾ ਕੁਝ ਹੈਗਾ। 

Alive is the thing progressive.

ਗੀਰਮ ਕਿ ਰਵਾਨਸ੍ਤ ਨਫ਼ਸ, ਆਬੋ-ਖ਼ੂਨ੍।। 

ਪਿੰਦਾਰ ਕਿ ਆਖ਼ਿਰ ਨਰਸਦ ਹਸ੍ਤ ਕਿ ਹਸ੍ਤ।।

On Transliteration of Urdu and Persian Verse

 #ਫ਼ਾਰਸੀ-ਉਰਦੂ ਕਾਵਿ ਦਾ ਲਿਪੀਅੰਤਰਨ


(੧)ਵਾਓ ਅਤੇ ਇਜ਼ਾਫ਼ੇ ਦਾ ਵਜੂਦ


ਅੱਜ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਅਤੇ ਸਲਾਹੁਣਯੋਗ ਕੰਮ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਉਰਦੂ ਤੋਂ ਜਾਂ ਫ਼ਾਰਸੀ ਆਦਿ ਭਾਸ਼ਾਵਾਂ 'ਤੋ ਗੁਰਮੁਖੀ 'ਚ #ਲਿਪੀਅੰਤਰਣ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਜਿੱਥੋਂ ਤੱਕ ਵਾਰਤਕ ਜਾਂ ਪ੍ਰੋਜ਼ ਦੀ ਗੱਲ ਹੈ ਕੋਈ ਖਾ਼ਸ ਦਿੱਕਤ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੀ। ਪਰ ਜਿਦੋਂ ਕਵਿਤਾ(ਛੰਦਾਤਮਕ ਆਦਿ) ਦੀ ਗੱਲ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਇਹ ਖ਼ਾਸ ਧਿਆਨ ਮੰਗਦੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਕਿ ਛੰਦ/ਬਹਿਰਾਂ 'ਚ ਜਾਂ ਕਵਿਤਾ ਦੇ ਆਹੰਗ/ਲਯ-ਤਾਲ 'ਚ ਕੋਈ ਊਣਤਾਈ ਨਾ ਆ ਜਾਵੇ। ਫ਼ਾਰਸੀ-ਉਰਦੂ ਕਾਵਿ ਪਰੰਪਰਾ 'ਚ ਛੰਦ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵੱਡਾ ਮੁਕਾਮ ਰੱਖਦਾ ਹੈ। ਅੰਗ੍ਰੇਜ਼ੀ ਦੇ ਕਵੀ ਤੇ ਆਲੋਚਕ #ਕਾਲਰਿਜ(S. T. Coleridge) ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ,"ਛੰਦ ਕੋਈ ਜਗਾੜੂ ਚੀਜ਼ ਨ੍ਹਈਂ ਹੈ ਸਗੋਂ ਇਹ ਤਾਂ ਕਵਿਤਾ ਦਾ ਅਨਿੱਖੜਵਾਂ ਅੰਗ ਹੈ।" ਕਿਸੇ ਵੀ ਭਾਸ਼ਾ ਦੀ ਪਰਵਿਰਤੀ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਰੱਖ ਕੇ ਹੀ ਲਿਪਿਅੰਤਰਣ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। 

    ਫ਼ਾਰਸੀ-ਉਰਦੂ ਦੀ ਲਿੱਪੀ (script) 'ਚ ਛੋਟੇ ਸ੍ਵਰਾਂ ਨੂੰ ਚਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ਼ ਦਰਸ਼ਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਰ ਇਹਨਾਂ ਚਿਨ੍ਹਾਂ(#Diacritcal marks) ਦਾ ਇਸਤੇਮਾਲ ਨਾ ਬਰਾਬਰ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਤੇ ਫ਼ਾਰਸੀ ਵਿੱਚ '#ਇਜ਼ਾਫ਼ਾ' (ਇਜ਼ਾਫ਼ਤ) ਦਾ ਬਹੁਤ ਹੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਕੰਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦਾ ਸ਼ਾਬਦਿਕ ਅਰਥ ਵੀ ਕਿਸੇ ਸ਼ਬਦ ਵਿੱਚ ਇਜ਼ਾਫ਼ਾ ਕਰਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਫ਼ਾਰਸੀ ਕਾਵਿਤਾ ਵਿੱਚ 'ਜ਼ਿਹਾਫ਼'(ਵਜ਼ਨ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ-ਘਾਟਾ ਕਰਨਾ:ਲਘੂ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਤੇ ਗੁਰੂ ਨੂੰ ਲਘੂ ਕਰਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ) ਵੀ ਆਮਤੌਰ ਤੇ ਇਜ਼ਾਫ਼ਤ ਨਾਲ਼ 'ਤੇ ਯੋਜਕ 'ਵ'(ਵਾਓ-ਅਤੇ) ਨਾਲ਼ ਲਗਦਾ ਹੈ। ਉਰਦੂ 'ਚ ਵੀ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਰਦੂ ਦੀ ਕਾਵਿ ਪਰੰਪਰਾ ਵੀ ਫ਼ਾਰਸੀ ਦੀ ਕਾਵਿ ਪਰੰਪਰਾ ਦਾ ਪੈਡਾ ਨੱਪਦੀ ਹੈ, ਅਨੁਸਰਣ ਕਰਦੀ ਹੈ। 

ਇਸ ਲਈ ਫ਼ਾਰਸੀ ਅਤੇ ਉਰਦੂ ਕਵਿਤਾ ਦਾ ਲਿਪਿਅੰਤਰਣ ਵੀ ਇਸ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਰੱਖ ਕੇ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਕਿਉਂਕਿ ਵਜ਼ਨ ਦੇ ਮੁਤਾਬਕ ਹੀ 'ਵ', 'ਓ' ਅਤੇ 'ਇ/ੇ' ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਦੀ ਹੈ। ਇਹਨਾਂ 'ਚ ਇ, ਏ, ਜਾਂ 'ੇ' 'ਚ ਤਾਂ ਛੁੱਟ ਮਿਲ਼ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਇਹਨਾਂ ਚੋਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਰੂਪ ਨਾਲ਼ ਲਿਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਜਿਹੜੀ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਇਜ਼ਾਫ਼ਤ ਲਗਦੀ ਹੈ ਉੱਥੇ ਨਾ ਲਾਉਣ ਨਾਲ ਉਹਦਾ ਆਹੰਗ ਭਿੱਟਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਮਿਸਾਲ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਕੁਝ ਸ਼ਿਅਰ ਦੇਖੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ, ਅਤੇ ਕਈ ਵਾਰੀ ਤਾਂ ਬਹਿਰ ਹੀ ਨਾ ਦਰੁਸਤ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ:

مرحوم کوۓ جاناں مقتول تیر ہجراں

ਮਰਹੂਮ ਕੂਏ ਜਾਨਾਂ ਮਕਤੂਲ ਤੀਰ ਹਿਜਰਾਂ

ਨੂੰ ਇਜ਼ਾਫ਼ਤ ਲਾ ਕੇ ਪੜ੍ਹਨਾ ਵਧੇਰੇ ਸਹੀ ਹੈ-

مستفعل فعولن مستفعلن فعولن

SSIS ISS SSIS ISS

ਮਰਹੂਮਿ-ਕੂਇ-ਜਾਨਾਂ ਮਕ਼ਤੂਲਿ-ਤੀਰਿ-ਹਿਜਰਾਂ

ਇਸ ਨੂੰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵੀ ਲਿਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ:

ਮਰਹੂਮੇ-ਕੂਏ-ਜਾਨਾਂ ਮਕਤੂਲੇ-ਤੀਰੇ ਹਿਜਰਾਂ


ਇ;ਏ;ੇ ਤਾਂ ਪਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਰ ਵਾਓ ਦਾ ਉੱਚਾਰਣ ਕਵਿਤਾ 'ਚ 'ਵ' ਅਤੇ 'ਓ' ਬਹਿਰ ਮੁਤਾਬਕ ਹੀ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਜਿਵੇਂ:


سرشار و رند بے دین اندوہناک غمگین

زار و نزار و حیران جو کچھ کہ ہوں سو میں ہوں

'ਸਰਸ਼ਾਰ ਵ' ਲਿਖਣਾ ਇਸ ਬਹਿਰ 'ਚ ਗ਼ਲਤ ਹੈ। 

ਸਰਸ਼ਾਰੋ/ਸਰਸ਼ਾਰ-ਓ-/ਸਰਸ਼ਾਰੁ- ਜੋ ਵੀ ਲਿਖਿਆ ਜਾਵੇ ਪਰ ਵਜ਼ਨ SSI ਹੀ ਰਹੂਗਾ ਅਤੇ ਸਰਸ਼ਾਰੋ 'ਚ 'ਰੋ' ਦਾ ਉਚਾਰਨ ਛੋਟਾ ਕਰਨਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਇਸ ਸ਼ਿਅਰ ਵਿੱਚ 'ਵਾਓ' ਦਾ ਉੱਚਾਰਣ ਕਿਤੇ ਵੀ 'ਵ' ਦੇ ਰੂਪ 'ਚ ਨਹੀ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ।

 S S I SI S S SSI S I S S

ਸਰਸ਼ਾਰੋ-ਰਿੰਦ-ਬੇ-ਦੀਂ ਅੰਦੂਹਨਾਕ, ਗ਼ਮਗੀਂ 

ਜ਼ਾਰੋ-ਨਜ਼ਾਰੋ-ਹੈਰਾਂ ਜੋ ਕੁਛ ਕਿ ਹੂੰ ਸੋ ਮੈਂ ਹੂੰ। 

SS I S I SS S S I S I S S

(ਫ਼ਾਰਸੀ ਵਿੱਚ 'ਰਿੰਦਿ-ਬੀ ਦੀਨ੍' ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ)

'ਸੋ ਮੈਂ ਹੂੰ' ਦਾ ਹਿੰਦੀ ਮਾਤ੍ਰਿਕ ਭਾਰ- ਗੁਰੂ ਗੁਰੂ ਗੁਰੂ (੨੨੨) ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਫ਼ਾਰਸੀ ਦੇ ਛੰਦਾਂ 'ਚ ਜ਼ਿਹਾਫ਼ ਇੱਥੇ ਗੁਰੂ ਨੂੰ ਲਘੂ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਜਿਵੇ 'ਸੋ' ਦਾ ਵਜ਼ਨ ੨ ਨਾ ਹੋ ਕੇ ੧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤੇ 'ਸੋ' ਦਾ ਉੱਚਾਰਣ 'ਸੁ' ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਪਰ ਇਹਨੂੰ ਲਿਖਿਆ 'ਸੋ' ਹੀ ਜਾਉਗਾ ਕਿਉਂਕਿ ਹਿੰਦੀ ਵਿੱਚ (ਉਰਦ-ਹਿੰਦੀ: ਮੂਲ ਰੂਪ 'ਚ ਇੱਕ ਹੀ ਭਾਸ਼ਾ ਹੈ) 'ਸੋ' ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।

ਪਹਿਲੇ ਜ਼ਾਰ ਦੇ ਨਾਲ ਵਾਲਾ 'ਵਾਓ' 'ਓ' ਦੇ ਰੂਪ 'ਚ ਜ਼ਿਹਾਫ਼ ਲੱਗਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ ਜੀਹਨੂੰ ਜ਼ੋਰ ਦੇ ਕੇ ਪੜ੍ਹਨਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਦੂਜੇ ਨਜਾ਼ਰੋ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਜ਼ੋਰ ਤੋਂ। 

ਜੋ ਕੋਈ ਵੀ #ਜ਼ਿਹਾਫ਼ ਕੰਮ ਕਿਵੇਂ ਕਰਦਾ ਹੈ ਵੇਖਣ ਦਾ ਮਾਇਲ(ਚਾਹਵਾਨ) ਹੈ ਤਾਂ ਫ਼ਾਰਸੀ ਦੀ ਕਿਸੇ ਮਸਨਵੀ 'ਚ ਵੇਖ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਮਸਲਨ: ਸ਼ਾਹਨਾਮਾ, ਮਸਨਵੀਏ-ਮਅਨਵੀ,

ਜ਼ਿੰਦਗੀਨਾਮਾ, ਜ਼ਫ਼ਰਨਾਮਾ ਆਦਿ। 

Note: ਇਸ ਮਸਲੇ ते ਵੱਖ-ਵੱਖ ਵਿਚਾਰ ਹਨ। ਉਤਾਂਹ ਲਿਖੇ ਸ਼ਬਦ ਹਰਫ਼ਿ-ਆਖ਼ਿਰ ਨਹੀ ਹਨ।

Jagdish Singh Ramána

 ہر ایک رگ سے ہوتا کاشکہ رواں غم اس کا

بیٹھا ہے چھپ کے اک مدت سے جا کیے ہوے

Dil te pâtthar chā' te râkhyā

 ਦਿਲ ਤੇ ਸੱਥਰ ਚਾ' ਤੇ ਰੱਖਿਆ, 

ਬਾਕੀ ਵਾਹਣ ਮੈਂ ਵਾਹ ਤੇ ਰੱਖਿਆ। 

دل تے  ستھر چاء تے رکھیا

باقی واہنڑ میں واہ تے رکھیا


ਤੱਕਲ਼ੇ ਵਾਂਗੂੰ ਸਿੱਧੇ ਵੱਜਸਣ, 

ਵਲ਼-ਵਿੰਗ, ਗਲੋਟਾ ਲਾਹ ਤੇ ਰੱਖਿਆ।

 تکلے وانگوں سدھے وجسنڑ

ول ونگ گلوٹا لاہ تے رکھیا


ਸਖ਼ਤ ਕਰੋਪ, 'ਤੇ ਭੱਖੜੇ, ਸੂਲ਼ਾਂ,

ਪੈਰ ਪਰੇੜੇ  ਰਾਹ ਤੇ ਰੱਖਿਆ। 

سخت کروپ تے بھکھڑے سولاں

پیر پریڑے راہ تے رکھیا


 ਸੱਭ  ਨੂੰ ਨੇਂਹ ਨਾਲ਼ ਠਗਦਾ ਜਿਹੜਾ, 

ਠੱਗ ਦਾ ਵਿਰਦ ਮੈਂ ਸਾਹ ਤੇ ਰੱਖਿਆ।

سبھ نوں نیہ نال ٹھگدا جہڑا

ٹگ دا ورد میں ساہ تے رکھیا

#vadhu #ਵਾਧੂ

Sunday, 8 October 2023


ਸਾਹਿਬ-ਦਿਲਾਂ ਦੀਆਂ ਕਿਆ ਬਾਤਾਂ!

ਮਸਕੀਨਾਂ ਦਾ ਹੋਵੇ ਰੱਬ ਰਾਖਾ।

ਇਕ-ਇਕ ਕੜ ਖੱਟ ਸੁੱਟ ਮੁੜ ਅੰਦਰਲੇ,

ਜਦ ਤਿੱਕਰ ਨਿਕਲੇ ਨਾ ਜਲ ਮਿੱਠਾ|

                - ਬੇਖ਼ਬਰ ਖ਼ੁਸ਼ਦਿਲ


साहिब-दिलान् दीयाँ क्या बातां!

मस्कीनां दा होवे रब्ब राखा।

इक इक कड़ खट्ट सुट मुड़ अंदरले

जद तिक्कर निकले ना जल मिठ्ठा।

A personal brief note on the Persian poetry of Agha Jawad and Dr. Balram Shukla

1) Salam Hazrate-khorshid by Mr. Emad Rabbani (Agha Jawad) My Ostad. Agha Jawad always helps me recite and correct my Persian poems.     Ag...